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केरल सरकार से हाई कोर्ट ने पूछा बड़ा सवाल

हाई कोर्ट ने केरल के सी एम् से किया सवाल, सरकारी खजाने से, आखिर मदस-रे के अध्यापको को ही पेंशन क्यों ? जिस पर सी एम् का आया ये जबाब ! चलिए जानते है ऐसा फैंसला क्यों लिया गया ! पूरा मामला आखिर है क्या !

कुछ समय पहले ही देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए है इन राज्यों में असम, पश्चिम बंगाल, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु शामिल थे। केरल में वा’ म सरकार दोबारा सत्ता में आई है। केरल हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से पूछा की आखिर मदर’ से के शिक्षकों को सरकारी ख़ज़ाने से पेंशन क्यों दी जाए ?

म- दरसे वाले शिक्षकों को ही पेंशन क्यों

सूबे में एक नए मामले ने तूल पकड़ लिया है। केरल उच्च न्यायालय ने पिनराई विजयन की सरकार से पूछा है कि वह मद रसा शिक्षकों को पेंशन देते हुए एक धार्मिक गतिविधि का क्यों हवा दे रही है। केरल उच्च न्यायालय ने ये सवाल मंगलवार (1 जून) को राज्य में मदर सा शिक्षकों को पेंशन देने के सरकार के पहले के फैसले के खि लाफ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा। आपको बता दें कि इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि उसने केरल मद रसा शिक्षक कल्याण कोष में किसी प्रकार का कोई योगदान दिया है या नहीं?

केरल सरकार का दोहरा चरित्र आया सामने

केरल हाई कोर्ट के न्यायाधीश ए मो हम्मद मुस्ताक और न्यायाधीश कौसर एडप्पागथ की पीठ ने लोकतंत्र, समानता, शांति और धर्म निरपेक्षता के लिए नागरिक संगठन के सचिव मनोज की ओर से दाखिल की गई जनहित याचिका पर यह आदेश जारी किया। इसमें केरल के मद रसा शिक्षक कल्याण कोष अधिनियम, 2019 को हटाने की माँग की गई है। केरल सरकार ने इस अधिनियम को मदर सा शिक्षकों को पेंशन सहित दूसरे फायदे देने के लिए विधानसभा में पारित किया था।

याचिकाकर्ता के वकील सी राजेंद्रन ने हाई कोर्ट में बताया कि उस अधिनियम को पढ़ने के बाद ये स्पष्ट हो गया है कि ये म दरसे सिर्फ कुरान और इ स्लाम से जुड़ी शिक्षा देते हैं। यह सामान्य शिक्षा से एकदम अलग है। ऐसे में इसके लिए भारी मात्रा में वित्त उपलब्ध करना पूरी तरह से असंवैधानिक और संविधान में निहित धर्म निरपेक्षता के सिद्धांतों की अवहेलना के समान है।

 

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