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समाज के तानो ने टूटने नही दिया दिव्यांग इरा का सपना,UPSC क्लीयर होने पर भी नहीं मिला कोई पद, एक और प्रयास ने बनाया ऑल इंडिया टॉपर

मित्रों इस दुनिया में हर किसी का कोई न कोई सपना होता है जिसे पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत करता है पर कभी-कभी ऐसा होता है कि मेहनत करते है पर असफलता हाथ लगती है और हम हार  मान लेते है पर कहते है न जो कि ‘न पूरा हो उसे अरमान कहते हैं,जो न बदले उसे ईमान कहते हैं,ज़िन्दगी मुश्किलों में भले ही बीत जाये,पर जो झुकता नहीं उसे इंसान कहते हैं। अगर हमारे जीवन में हार नहीं होगी तो हमे सीख कहा से मिलेगी हमे हार से ही सीख मिलती है अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो उसे कोई नही रोक सकता मन के हारे हार है मन के जीते जीत इंसान शरीर से भले ही कमजोर हो पर मन से मजबूत होना चाहिए आज हम एक ऐसी दिव्यांगता की सफलता की कहानी के बारे में बताने वाले है को सबके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा होगी  जानने खबर को विस्तार से पढ़े

दिव्यांगता के कारण UPSC क्रैक करने के बावजूद जब नहीं मिला कोई पद, तब दोबारा परीक्षा देकर बनीं ऑल इंडिया टॉपर

दरअसल उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की रहने वाली इरा सिंघल आज देश की जानी मानी आईएएस ऑफिसर हैं हालांकि, इस पद तक पहुंचने के लिए उन्हें काफी ज्यादा संघर्ष करना पड़ा था आपको बता दें कि इरा का बचपन मेरठ में गुजरा था जिस कारण उन्होंने अक्सर शहर में कर्फ्यू लगते हुए देखा था ऐसे में जब उन्होंने लोगों को बातचीत करते हुए सुना, तब उन्हें पता लगा कि कर्फ्यू लगाने का आदेश डीएम द्वारा दिया जाता है और उनके पास कई तरह की कानूनी ताकतें होती हैं बस फिर क्या था, इरा के मन में आईएएस ऑफिसर बनने की इच्छा ने जन्म ले लिया जब भी इरा अपने आईएएस ऑफिसर बनने के सपने का जिक्र करती थी तो अक्सर लोग उनका मजाक उड़ाना शुरू कर देते थे ऐसा इसलिए होता था क्योंकि इरा बचपन से ही शारीरिक रूप से दिव्यांग थी यहां तक कि वे सही से चल भी नहीं पाती थी तो ऐसे में लोग उनका मजाक उड़ाते हुए कहते थे कि जो खुद अच्छी तरह से चल नहीं पाती, वो समाज को कैसे चलाएगी इरा ने कभी भी लोगों द्वारा दिए गए तानों को दिल पर नहीं लिया और पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने सपने को पूरा करने की कोशिश में जुट गई इरा ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद दिल्ली के नेताजी सुभाष इंस्ट्टीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक और एमबीए की पढ़ाई पूरी की इसके बाद उन्होंने कोका कोला और कैडबरी जैसी बड़ी पेय पदार्थ कंपनियों के साथ काम किया.

मिली जानकरी के मुताबिक लेकिन इस दौरान उनके मन में आईएएस ऑफिसर बनने का सपना लगातार पनप रहा था ऐसे में उन्होंने अपने सपने को पूरा करने की ठानी और नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास भी कर ली, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें उस साल दिव्यांग होने की वजह से किसी भी सरकारी पद पर नियुक्ति नहीं दी गई ऐसे में इरा ने हार ना मानते हुए परीक्षा पास करने के बावजूद भी पोस्टिंग न दिए जाने के खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में अर्जी डाल दी, जिसके बाद करीब चार साल तक इरा का केस सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में चलता रहा आखिरकार सीएटी ने इरा के हक में फैसला सुनाया। चार साल लंबी कानूनी लड़ाई जीतने के बाद इरा सिंघल को हैदराबाद में सरकारी पद पर नियुक्त किया गया इरा के मन में कुछ और ही चल रहा था इरा ने दोबारा यूपीएससी की परीक्षा देने का मन बनाया फिर क्या था इस बार उन्होंने जनरल कैटेगरी में ऑल इंडिया टॉप करके अपने माता-पिता का नाम रोशन कर दिया और यह साबित भी कर दिया कि वह इस पद की वाकई हकदार है इरा ने अपने करियर में कुल तीन बार यूपीएससी की परीक्षा पास की है.

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