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पितृ पक्ष में मिलेगा पितरो का आशीर्वाद

1 सितम्बर से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, इस बार 165 साल के बाद बन रहा है ऐसा योग, जिसके एक महीने के बाद होगी नवरात्री ! जानकारी के लिए निचे दी गयी पूरी खबर पड़ें !

हिन्दू धर्म में जिस प्रकार व्रत त्यौहारो का बहुत महत्व है ! उसी प्रकार पितृ पक्ष का भी बहुत महत्व है ! पितृ पक्ष के समय हमारे पूर्वज धरती पर होते है ! हम उनका श्राद करते है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है ! हिन्दू धर्म में माना जाता है यदि पूर्वजो का विधि -विधान से श्राद न किया जाये तो वे  भुत -प्रेत बन जाते है ! और इसी  संसार में भटकते रहते है ! और उन्हें कभी मुक्ति नही मिलती !   इसलिए पितरो को मुक्ति दिलाने के लिए हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है !

हिन्दू पंचांग के मुताबिक इस साल का पितृ पक्ष 01 सितम्बर से शुरू होकर 17 सितम्बर 2020 तक चलेगा. यानी कि इस साल पितृ पक्ष की कुल अवधि 17 दिनों की होगी. हिन्दू पंचांग के मुताबिक यह पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है जिसमें पितृ तर्पण किया जाता है. हिन्दू धर्म के मुताबिक जो भी व्यक्ति पितृ पक्ष के इन दिनों में अपने पूर्वजों का तर्पण करता है. उस व्यक्ति को उसके पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जिसके फलस्वरूप व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं.


इस बार पितृ पक्ष में 165 साल बाद बन रहा है ऐसा अद्भुत संयोग:
इस बार के पितृ पक्ष में एक ऐसा संयोग बन रहा है जो कि 165 साल बाद आया है. 165 साल बाद बनने वाले इस संयोग के मुताबिक हर साल पितृ पक्ष के ख़त्म होने के अगले दिन से नवरात्र शुरू हो जाता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है क्योंकि इस बार पितृ पक्ष ख़त्म होते ही अधिमास या अधिकमास लग रहा है. इसी अधिमास के चलते पितृ पक्ष और नवरात्र के बीच एक महीने का अंतर आ जा रहा है और ऐसा संयोग 165 साल के बाद आने जा रहा है कि जब आश्विन मास में मलमास लगेगा और एक महीने के बाद या अंतर पर नवरात्र शुरू होंगे. इस साल अधिमास 18 सितम्बर 2020 से शुरू होकर 16 अक्टूबर 2020 तक चलेगा और इसके अगले दिन से या 17 अक्टूबर 2020 से नवरात्र शुरू हो जाएगे !

अधिमास क्या होता है?
एक सूर्य वर्ष की अवधि 365 दिन और लगभग 6 घंटे की होती है जबकि एक चन्द्र वर्ष की अवधि 354 दिनों की होती है. गणना करने पर सूर्य वर्ष और चन्द्र वर्ष के बीच करीब 11 दिनों का अंतर प्राप्त होता है. 11 दिनों का यह अंतर हर तीन साल में करीब एक महीने (33 दिन) के बराबर होता है. इसी एक महीने के अंतर को ख़त्म करने के लिए ही हर तीन साल में एक चन्द्र मास अतिरिक्त या अधिक आता है. इसी अतिरिक्त चन्द्र मास को ही अधिमास कहा जाता है.
इस बार चातुर्मास भी होगा 5 महीने का:
हर साल जो चातुर्मास 4 महीने का होता  था इस बार लीप ईयर की वजह से 5 महीने का होगा. इस साल, 160 साल के बाद ऐसा होने जा रहा है कि जब लीप ईयर और अधिमास एक ही साल में पड़ रहा है.

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