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कहीं चिकन तो कहीं मटन बिरयानी,देश के ऐसे मंदिर जहाँ प्रसाद में चढ़ता है मांस-मछली

मित्रों हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ को बहुत महत्व दिया गया है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। वहीं घर में पूजा-पाठ करने के अलावा मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन और प्रार्थना को भी बहुत लाभदायी माना जाता है। मंदिरों का हिंदू धर्म में खासा महत्व रहा है, लेकिन मंदिर जरूरी है या नहीं है ये इंसान के  दिनचर्या  पर निर्भर करता है धार्मिक मान्यताओं के साथ साथ लोगो की अपनी अपनी धार्मिक परम्पराये और मान्यताये भी है क्या कई मंदिरों में चढ़ता है मांस जानने के लिए पोस्ट के अंत तक बने रहिये

दरअसल भारत में जितने राज्य, जितने शहर, जितने गांव उतनी ही परम्पराएं हैं। ऐसी परम्पराएं, जिन्हें देख तमाम लोग ताज्जुब करते हैं, कई लोग हॉंसते हैं तो कुछ कहते हैं, ये क्या ढकोसला है कुछ ऐसी परम्पराएं, है जो आप जानने के बाद यकीन करना शुरू कर दोगे जी हां भारत में कई ऐसे मंदिर और धार्मिक स्थल हैं जहां प्रसाद के तौर पर मीट मांस चढ़ता और बंटता जाता है। देश के अलग अलग राज्यों में यह मंदिर स्थित हैं। आइए जानते हैं उन मंदिरों के नाम और जानते हैं प्रसाद में क्या चढ़ता है

पश्चिम बंगाल के ही दक्षिणेश्वर काली के मंदिर में मछली को प्रसाद के तौर पर चढ़ाया और बांटा जाता है। पश्चिम बंगाल के मशहूर कालीघाट मंदिर में बकरे का मांस चढ़ाया जाता है।

असम के कामाख्या देवी मंदिर में मछली और मीट का भोग भी लगाया जाता है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित तरकुलहा देवी मंदिर में बकरे का मांस प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है।

बंगाल के तारापीठ मंदिर में मछली और मीट प्रसाद के तौर पर मिलता है।

तमिलनाडु के मुनियांदी स्वामी मंदिर में चिकन और मटन बिरयानी बतौर प्रसाद मिलता है।

केरल के परासिनिक करवु मंदिर में मछली और ताड़ी चढ़ाया जाता है।

ओडिशा के पुरी में स्थित बिमला देवी मंदिर में मटन और मछली से बना प्रसाद मिलता है।

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