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जन्माष्टमी के पावन पर्व पर जानिये श्री कृष्ण से जुड़ी बाते,कब हुई शादी,कितने थे बच्चे और किस उम्र में कैसे हुई मृत्यु

मित्रों आप लोग इस बात से अवगत होगे कि हम सभी की अपनी अपनी भक्ति होती है हम सभी लोगों अपने तरीके से अलग अलग भगवान को मानते है पर आज हम बात करने वाले भगवान श्री कृष्ण के बारे में आप लोगों ने कई सारी लीलावो के बारे में सुना और देखा होगा भगवान श्री कृष्ण हमेशा मित्रता को ही महत्व दिया। चाहे सुदामा हो, अर्जुन हो गया फिर कलिकाल में भक्त माधवदास और मीरा। श्रीकृष्‍ण अपने भक्तों के सखा भी और गुरु भी हैं वे प्रेमी और सखा बनकर गुर ज्ञान देते हैं श्री कृष्ण के बारे में कुछ ऐसी बातें हैं जो शायद ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं जैसे कब और कैसे भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु हुई थी उनकी उम्र कितनी थी और उनके कितने बच्चें थे इसके बारे में आगे जानने के लिए पोस्र्ट के अंत तक बने रहिये

दरअसल भगवान श्रीकृष्ण विष्णु भगवान आठवें अवतार है श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मथुरा की जेल में हुआ था श्रीकृष्ण का बचपन गोकुल और आसपास के गांवों में बीता था अक्सर हम भगवान श्रीकृष्ण को मक्खन चोर के रूप में देखा है और श्रीकृष्ण ने कई सारी नटखट बाल लीलाये भी की है इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका नगरी पर राज किया। भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत में अर्जुन के सारथी के रूप साथ दिया और भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के बीच उन्हें गीता का ज्ञान दिया था महाभारत के युद्ध में उन्होंने पांडवों का साथ दिया और अधर्म पर धर्म की जीत कराने में अहम भूमिका निभाई। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म 27 जुलाई, 3112 ईसा पूर्व आधी रात के आसपास हुआ था उस रात चंद्रमा का आठवां चरण था जिसे अष्टमी तिथि के रूप में जाना जाता है भाद्रपद अगस्त-सितंबर महीने के अंधेरे पखवाड़े की अष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के जन्म के जश्न के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है

आपको बता दे कि श्रीकृष्ण को कान्हा, कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश या द्वारकाधीश और वासुदेव आदि नामों से जाना जाता है श्रीकृष्ण भगवान शिव ने बांसुरी दी और उन्होंने ही बांसुरी बजाना भी सिखाया भगवान कृष्ण श्याम वर्ण के थे ओडिशा में पारंपरिक पट्टा चित्र कपड़ा कला में भी भगवान कृष्ण और विष्णु को हमेशा सांवले रंग का दिखाया गया है इसी वजह से उन्हें सांवला सुंदर भी कहा जाता है भगवान श्रीकृष्ण ने देवी राधा से इसलिए विवाह नहीं किया ताकि मनुष्यों को आंतरिक प्रेम के बारे मे सिखाया जा सके ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की सिर्फ 8 पत्नियां थी जिनके नाम रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा था आठ पत्नियों से हर एक से भगवान कृष्ण को 10 बेटे हुए यानि कुल मिलाकर भगवान के 80 पुत्र थे इन 08 रानियों को अष्टा भार्या भी कहा जाता था भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु जरा नामक बहेलिए के तीर से हुई थी कृष्ण पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे, तभी बहेलिए ने हिरण समझकर दूर से उनपर तीर चला दिया जो उनके पैरों में जाकर लगा जिससे उनकी मृत्यु हो गई उनकी उम्र 125 साल 8 महीने और 7 दिन थी.

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