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पत्रकार क्रिस्टीन के सामने नही चला ईरानी राष्ट्रपति का तानाशाही आदेश,एंकर ने दिया करारा जबाब

मित्रों दुनिया की बहुत सी संस्कृतियों में औरतों को अपना सिर और बाल ढककर रखने की बात कही जाती है इस्लाम में औरतों को अपने पिता और पति के अलावा अन्य सभी आदमियों के सामने खुद को ढककर रखने की बात कही जाती है ऐसे में औरतें खुद को ढकने के लिए एक खास किस्म का परिधान इस्तेमाल करती हैं और पूरी दुनिया में बहुत सी मुस्लिम महिलाएं सिर से पांव तक एक बड़ा सा कपड़ा ओढ़ती हैं जिसे हिजाब कहा जाता है हिजाब पर तमाम देशों में हर बार अलग-अलग तरह की बहस छिड़ती है आमतौर पर हर जगह इसी पर विवाद भी होता है कि हिजाब पहनने को लेकर आजादी मिलनी चाहिए या नहीं या फिर कुछ देशों में इस बात को लेकर बहस होती है कि हिजाब अपनी मर्जी से पहनने दिया जाए, यानी इसकी अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए एक ऐसा ही विवाद सामने आया है जहाँ पिछले कुछ दिनों से ईरान में हिजाब को लेकर चिंगारी लगातार सुलग रही है इस खबर के बारे में विस्तार से जानने के लिए पोस्ट में अंत तक बने रहिये।

हिजाब विवाद : सिर ढंक कर इंटरव्यू लो, ईरानी राष्ट्रपति के इस तानाशाही आदेश का पत्रकार ने यूं दिया जवाब

दरअसल ईरान इन दिनों हिजाब के चलते एक लड़की की पुलिस कस्टडी में हुई मौ”त होने के बाद से ही वहां जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी इन दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा की मीटिंग में शामिल होने के लिए इन न्यूयॉर्क में हैं। सीएनएन में एंकर क्रिस्टीन एमनपोर के साथ 21 सितंबर को उनका इंटरव्यू फिक्स हुआ था। लेकिन इसके लिए राष्ट्रपति इब्राहिम ने एंकर क्रिस्टीन एमनपोर के सामने एक शर्त रख दी। कि वो उनका इंटरव्यू हिजाब पहनकर लें। क्रिस्टीन ने राष्ट्रपति की इस बात से साफ इनकार कर दिया। क्रिस्टीन ने कहा- यहां ऐसा कोई नियम नहीं है। आपको बता दें कि इसके बाद रईसी का इंटरव्यू नहीं हो पाया। सीएनएन में काम करने वाली एंकर क्रिस्टीन एमनपोर ईरानी मूल की हैं। उनकी परवरिश तेहरान में हुई है। क्रिस्टीन ने कहा- जब मैं ईरान में रिपोर्टिंग करती थी तो मुझे वहां के कानून के हिसाब से हिजाब पहनना पड़ता था। लेकिन अब मैं एक ऐसे देश में रह रही हूं, जहां इंटरव्यू के लिए हिजाब पहनने का कोई रूल नहीं है।

मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 27 सालों में मैंने कई इंटरव्यू लिए, लेकिन किसी ने मुझे हिजाब पहनने के लिए नहीं टोका।ईरान में हिजाब के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन में अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है। मिली जानकारी के मुताबिक, सिर्फ अमोल शहर में ही 10 लोग मारे गए हैं। उग्र प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी है। बता दें कि ईरान में हिजाब को लेकर हो रही हिंसा की यूएन के अलावा अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने भी आलोचना की है।  ईरान पुलिस ने 13 सितंबर को 22 साल की युवती महसा अमिनी को ठीक तरीके से हिजाब न पहनने की वजह से हिरासत में लिया था। तीन दिन बाद 16 सितंबर को पुलिस कस्टडी में ही उसकी मौत हो गई। अमिनी की मौत सिर पर चोट लगने की वजह से हुई। इसके बाद पूरे ईरान में लोग हिजाब को लेकर सड़कों पर उतर आए। महिलाओं ने जगह-जगह हिजाब जलाने के साथ ही अपने बाल काटने शुरू कर दिए। ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वहां शरिया कानून लागू हो गया। इसके चलते लोगों पर कई तरह की पाबंदियां हैं। कट्टर इस्लामिक शरिया कानून के चलते महिलाओं को बाल ढंकने और ढीले-ढाले कपड़े पहनने के लिए मना किया जाता है। ऐसा न करने पर सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

क्या कहता है शरिया कानून?
– महिलाएं हिजाब पहनें, इसके लिए वहां की सरकार ने मॉरल पुलिस का गठन किया है। यह पुलिस हिजाब के नियम को लागू करवाने के लिए कई बार लोगों पर बेइंतहा जुल्म करती है।
– ईरान एक इस्लामिक देश है, जहां शरिया कानून लागू है। ईरान में सात साल से बड़ी लड़की को बिना हिजाब के घर से बाहर निकलने की मनाही है।
– इसके साथ ही लड़कियों को सात साल के बाद लंबे और ढीले कपड़े पहनने पड़ते हैं। ईरान में कोई लड़की सार्वजनिक तौर पर किसी मर्द से हाथ नहीं मिला सकती है।
– यहां तक कि ईरान की महिलाओं को पुरुष खेलों को देखने के लिए उन्हें स्टेडियम जाने की इजाजत भी नहीं होती।

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