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देवदूत बनकर लोगो की जान बचाने वाले DR अरुण प्रताप ने छोड़ी दुनिया,वैष्णो देवी हाद’से में

दोस्तों वैष्णो देवी में हुए हा-द-से का दुःख सभी को है .इस यात्रा में अपनी जिन्दगी खोने वालो को कंहा  पता था कि ये उनकी अंतिम यात्रा है और वो लौट कर वापिस नही आने वाले . इसी हादसे में हम सबने एक बहुत ही अच्छे इंसान को खो दिया . हम सबको जिनकी बहुत ज्यादा  जरूरत थी .ऐसे लोग दुनिया में बहुत कम देखने को मिलते है .जो दुसरो के दर्द और तकलीफ को समझे और दुसरो की मदद के लिए हमेशा आगे आये . इनकी यही खासियत इन्हें सबसे अलग दिखाती थी .बेशक आज वो इस दुनिया में नही है पर सबके दिलो में वो हमेशा जिन्दा रहेगे .

डा.अरुण प्रताप सिंह के सरल स्वभाव का हर कोई कायल था. मृदुभाषी और व्यवहारकुशलता उनकी खास पहचान थी. लोगों की मदद के लिए वह हमेशा तैयार रहते थे.गरीब मरीजों के इलाज का काफी खर्च का वह खुद वहन करते थे.कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में वह पीडि़तों की जिंदगी बचाने में जी-जान से जुटने के साथ ही गांव के सामने हाईवे पर स्टाल लगाकर राहगीरों को भोजन व पानी उपलब्ध कराया था.दोस्त बताते हैं कि डा.अरुण प्रताप अपने अच्छे  व्यवहार के चलते मशहूर थे.ऐसे मददगार का चले जाना हर किसी को खल रहा है.

डा.अरुण प्रताप के

बचपन के मित्र दीपक,आनंद,धर्मवीर,पूर्व प्रधान जैनेंद्र मल्ल ने बताया कि पीडि़त की मदद के लिए वह वह हमेशा तैयार रहते थे.लोगों को अपने मददगार का हमेशा के लिए चले जाना काफी खल रहा है.बीते एक दिसंबर को उनकी शादी कुशीनगर जिले के गोविंद नगर धूस गांव की रहने वाली डा.अर्चना सिंह से हुई थी.अपनी पत्नी के साथ वह शहर में ही रहते थे.जबकि माता और पिता गांव में रहते हैं.

परिवार में अरूण के अलावा

उनकी एक छोटी बहन भी हैं.उनके मौत की खबर आते ही पूरे गांव में मातम छा गया.आसपास के गांव के लोग भी उनके घर पहुंच गए.डा.अरुण के पिता पूर्व प्रधान सत्यप्रकाश ङ्क्षसह ने बताया कि शादी के बाद से ब’चों का बाहर घूमने का प्लान था.लेकिन अरूण का कहना था कि पहले मां वैष्णो देवी का दर्शन करेंगे.इसके बाद ही कहीं और जाएंगे.

चौरीचौरा के रामपुर बुजुर्ग

और आसपास के गांवों के लोगों ने नववर्ष की खुशी मनाने की अ’छी खासी तैयारी की थी.पर सुबह लोगों को हादसे में डॉक्टर अरुण प्रताप की भी मौत की सूचना मिली तो वे गमजदा हो गए.नववर्ष को भूलकर लोग दिवंगत डॉक्टर के घर शोकसंतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचने लगे.लोगों का कहना था कि नए साल के पहले दिन मिले इस सदमे को यह परिवार शायद कभी नहीं भूल पाएगा.डा.अर्चना के हाथों से शादी की मेंहदी का रंग अभी नहीं छूटा है.वैष्णो देवी मंदिर में पति के साथ वह बड़े उत्साह से दर्शन करने और पति के लंबी आयु का आशीर्वाद मांगने पहुंची थी.लेकिन अचानक मची भगदड़ में उनकी सारी खुशी छिन गई.एक माह में ही पति का साथ छूट गया.हादसे के बाद डा. अर्चना बेसुध हो गई हैं।

साथ में गए दोस्तों ने

उन्हें किसी तरह संभाला.डा.अरुण की भगदड़ में मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया.स्वजन व रिश्तेदारों ने डा. अर्चना से फोन पर बात की तो वह यह कहते हुए बिलख पड़ी.उनसे यह पूछ रही थीं कि आखिर माता ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया.मेरी गलती क्या है.सास तारा देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है. स्वजन ने बताया कि 29 दिसंबर को डा.अरुण पत्नी के साथ वैष्णो देवी के लिए यहां से निकले.उनके साथ मित्र व रिश्तेदार भी गए थे.उनकी बहन की शादी हो चुकी है.पिता सत्यप्रकाश ङ्क्षसह ने बताया कि बीती रात में बेटे से बात हुई तो उन्होंने बताया कि वैष्णो माता का दर्शन के लिए कटरा से चढ़ाई शुरू कर दिया है.

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