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नीले चाँद का सच

31 अक्‍टूबर का दिन हम सभी के लिए बड़ा ही खास होने वाला है क्योंकि इस दिन आसमान में ब्लू मून दिखेगा। आने वाले शनिवार को इस दौरान एक महीने के भीतर दूसरी बार ऐसा मौका आने वाले है जब दुर्लभ पूर्ण चंद्रमा आसमान में चमचमाता हुआ नजर आएगा। आपको बता दें सामान्‍य तौर पर एक महीने में एक बार पूर्णिमा और एक बार अमावस्या पड़ती लेकिन ये बहुत ही दुर्लभ होता है कि एक माह में दो बार पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) होती है और ऐसे दूसरे पूर्ण चंद्र को ‘ब्लू मून’ कहा जाता है, 31 अक्‍टूबर को भी ऐसा ही संयोग पड़ने वाला है।

बता दें 1अक्टूबर को पूर्णिमा यानी की फुल मून था अक्‍टूबर माह में ही दूसरी पूर्णिमा महीने की आखिरी तारीफ 31 अक्‍टूबर को पड़ेगी। हालांकि इसे ब्लू मून इसलिए नहीं कहा जाता कि चांद ब्लू होगा। इसका अर्थ समय से है जब एक माह में दूसरी बार पूरा चांद (full moon) दिखेगा। दिल्ली के नेहरू तारामंडल की निदेशक एन रत्नाश्री ने बताया कि इसमें गणितीय गणना भी सम्मिलित है। विशेषज्ञों के अनुसार ”चंद्र मास की अवधि 29.531 दिनों अथवा 29 दिन, 12 घंटे, 44 मिनट और 38 सेकेंड की होती है, इसलिए एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होने के लिए पहली पूर्णिमा उस महीने की पहली या दूसरी तारीख को होनी चाहिए। ”

दिल्ली के नेहरू तारामंडल की निदेशक एन रत्नाश्री ने जानकारी दी कि जिस माह में 30 दिन होते हैं उस महीने के दौरान ब्लू मून होना कोई मामूली या आम बात नहीं है। 30 दिनों वाले महीने में अंतिम बार ‘ब्लू मून’ 30 जून, 2007 में दिखा था और 31 अक्‍टूबर 2020 के बाद अगला 30 सितंबर, 2050 को होगा।वर्ष 2018 में दो बार ऐसा अवसर आया जब ‘ब्लू मून’ की घटना हुई थी। उस दौरान पहला ‘ब्लू मून’ 31 जनवरी जबकि दूसरा 31 मार्च को हुआ. इसके बाद अगला ‘ब्लू मून’ 31 अगस्त 2023 को होगा।

सौ साल में ऐसा 41 बार होता है जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा हो अंग्रेज़ी महीना प्रायः 30.5 दिन का होता है और चाँद का महीना 29.5 दिन का, इस प्रकार सौ साल में ऐसा 41 बार होता है जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा हो! यहीं कारण है कि ब्लू मून को मुहावरे के तौर पर भी प्रयोग किया जाता है। इस से बनने वाला एक और मुहावरा है Once in a blue moon (वंस इन ए ब्लू मून). उर्दू और हिंदी में ‘ईद का चांद’ के रूप में इसका प्रयोग करते हैं। इसका प्रयोग किसी ऐसी घटना के बारे में भी होता है जो कभी न घटित हो क्योंकि हम कभी ऐसा चाँद नहीं देखते हैं जो नीला हो, लेकिन वास्तव में चाँद उस वक़्त नीला हो सकता है जब वातावरण में बहुत सारा गर्द-ग़ुबार या धुआं फैल जाए जैसा कि वर्ष 1951 में कनाडा के जंगल में लगने वाली आग या वर्ष 1883 में कराकटवा में ज्वालामुखी के फटने के बाद चांद नीला दिखने

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