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मदरसों के बाद योगी सरकार के टारगेट पर वक्फ बोर्ड की संपत्तियां, जांच का लिया फैंसला

मित्रों आज के समय में सोशल मिडिया इतनी तीव्रता से खबरों के बारे में आपको जानकारी देता है इसके चलते आपको कई तरह की खबरे मिलती रहती है यह तो जानते ही हो कि हमारे देश में कई तरह के स्कूल पाए जाते है जिसमे पिछली सरकारों में शिक्षा व्यवस्था इतनी अच्छी नहीं थी जितना हमारी मौजूदा सरकार ने कर दिखाया है इसके चलते हमारे देश की मौजूदा सरकार ने इस संबध में कई तरह के ठोस कदम उठायें है जिसके चलते मुस्लिम समाज के लिए बच्चों की शिक्षा व्यवस्था अच्छी हो सके इसके लिए अब यूपी की योगी सरकार प्रदेश के मदरसों के बाद अब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का भी सर्वे करवाएगी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महीने के भीतर सर्वे पूरा करवाने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है, साथ ही उन्होंने निर्देश दिए हैं कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाए, इतना ही नहीं प्रदेश भर के 75 जिलों में जितनी भी जमीनें हैं उन्हें वक्फ के नाम से अभिलेखों में दर्ज कराया जाए। इस खबर को विस्तार से जानने के लिए पोस्ट के अंत तक बने रहिये।

दरअसल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मदरसों के बाद वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सर्वे कराने का फैसला किया है यूपी सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री धरमपाल सिंह ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी धरमपाल सिंह ने कहा, वक्फ संपत्ति बहुत महत्वपूर्ण हैं इसको ना खर्च किया जाता है और ना दिया जा सकता है इन संपत्तियों का सार्वजनिक प्रयोग मुस्लिम समाज के लिए किया जा सके बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए हो सके, यही हमारी कोशिश है हम उन संपत्तियों पर आईएएस-आईपीएस की कोचिंग देने की भी व्यवस्था करेंगे सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, यूपी में प्रदेश के सभी जिलों में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों की जांच होगी साथ ही सरकार ने राजस्व विभाग के वर्ष 1989 के शासनादेश को भी निरस्त करते हुए  जांच एक माह में पूरा करने के निर्देश सभी जिलों को दिए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में संचालित हो रहे सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी मदरसों के सर्वेक्षण का 31 अगस्त को आदेश दिया था इसके लिए 10 सितंबर तक टीम गठित करने का काम खत्म कर लिया गया था आदेश के मुताबिक, 15 अक्टूबर तक सर्वे पूरा करके 25 अक्टूबर तक रिपोर्ट सरकार को सौंपने को कहा गया है प्रदेश में इस वक्त लगभग 16 हजार निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं, जिनमें विश्व प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षण संस्थान नदवतुल उलमा और दारुल उलूम देवबंद भी शामिल हैं। इस फैसले को लेकर निजी मदरसों के प्रबंधन और संचालकों ने तरह-तरह की आशंकाएं जाहिर की इसे लेकर छह सितंबर को दिल्ली में जमीयत-उलमा-ए-हिंद की एक बैठक भी हुई थी, जिसमें कहा गया था कि अगर सरकार सर्वे करना चाहती है तो करे, लेकिन मदरसों के अंदरूनी मामलों में कोई दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।

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