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होने वाला है तीसरा वर्ल्ड वा’र

चीन और अमेरिका की तैयारी को देखते हुए यही कहा जा रहा है कि तीसरा विश्वयुद्ध समंदर में होगा। और ये समंदर होगा दक्षिण चीन सागर। अब भारत भी दक्षिण चीन सागर पहुंच गया है। पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव को देखते हुए दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के जंगी पोत तैनात करने का फैसला हुआ है।

गलवान झड़प के बाद हुई तैनाती

सूत्रों के अनुसार, गलवान में हिंसक झड़प शुरू होने के तुरंत बाद भारतीय नौसेना ने अपना एक युद्धपोत दक्षिण चीन सागर के उस इलाके में तैनात किया जहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तैनात है और इलाके को अपना बताती है। इस मसले पर चीन ने राजनयिक स्तर की वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष से शिकायत की। भारतीय युद्धपोत लगातार वहां मौजूद अमेरिका के युद्धपोतों से लगातार संपर्क बनाए हुए थे। नियमित अभ्यास के दौरान, भारतीय युद्धपोत को लगातार अन्य देशों के सैन्य जहाजों की आवाजाही की स्थिति के बारे में अपडेट किया जा रहा था।

चीनी नौसेना की गतिविधि पर नजर

इसी दौरान, भारतीय नौसेना ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास मलक्का स्ट्रेट में चीनी नौसेना की गतिविधि पर नजर रखने के लिए अपने जहाजों को तैनात किया। चीनी नौसेना इसी रास्ते से हिंद महासागर में प्रवेश करती है।मलक्का स्ट्रेट से भी चीन के कई जहाज तेल एवं अन्य वस्तुओं के साथ अन्य महाद्वीपों से आते हैं। मलक्का स्ट्रेट से हिंद महासागर की ओर चीनी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारतीय नौसेना विभिन्न स्वचालित पनडुब्बियों, मानवरहित सिस्टम एवं सेंसर भी लगाने की योजना बना रही है।

चीन को संकेत

दक्षिण चीन सागर में अपना युद्धपोत भेजकर भारत ने चीन के समक्ष यह जता दिया कि वह उसके सबसे अहम सामरिक मोर्चे पर भी चुनौती देने के लिए तैयार है। नौसेना ने एक वायुसेना बेस पर अपने मिग-29 लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं। ये विमान जमीनी एवं पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी टकराव का सामना करने के लिए अभ्यास कर रहे हैं।

दक्षिण चीन सागर मसला

दक्षिण चीन सागर पर चीन अपना दवा करता है और यहां वह कुछ कृत्रिम द्वीपों का निर्माण भी कर रहा है। इस क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों पर मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और ब्रुनेई जैसे देश भी अधिकार जताते हैं। दक्षिण चीन सागर का जबरदस्त आर्थिक और भू रणनीतिक महत्व है। दुनिया के एक तिहाई समुद्री जहाज यहीं से गुजरते हैं, जिनके जरिये हर साल तीन लाख करोड़ डॉलर का व्यापार होता है। इस क्षेत्र में समुद्र तल के नीचे तेल और प्राकृतिक गैस का प्रचुर भंडार है। अमेरिका चीन के प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है और उसने यहाँ अपने युद्धक पोत तैनात कर दिए हैं।

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