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विष्णु भगवान यहाँ करते है वास

भगवान् को मानने वालो लोगो के मन ये अक्सर ये सवाल रहता है कि आखिर भगवान् रहते कहाँ है ? कहाँ है ब्रह्मा जी का सत्यलोक ? इंद्र लोक किस जगह पर है ? आज हम आपको  इन्ही सब सवालों का जबाब देने जा रहे है ! पौराणिक ग्रंथो में बताया गया है कि इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति ब्रह्मा जी साथ ही हुयी है क्यूंकि उन्हों ने ही इस सृष्टि का निर्माण किया है और उनकी आयु पूरी होने के बाद इस ब्रह्माण्ड की का विनाश तय होता है.विष्णु पुराण के अनुसार वैकुण्ठ एक ऐसी जगह है जहाँ पर कई गृह होने के साथ लाखो सूर्य विद्यमान है ! भगवत पुराण में बताया गया है वैकुण्ठ, ध्रुव तारे की ओर है वैज्ञानिक भाषा में इसको पोल स्टार कहते है और यूनिवर्स में नक्षत्र ! यह नक्षत्र उत्तर दिशा की ओर स्थित है ध्रुव तारा पृथ्वी से 433 प्रकाश वर्ष की दुरी पर स्थित है किलो मीटर के हिसाब से इसकी दुरी बनती है चार पदम् दस नील चालीस ख़रब किलो मीटर ! मतलब चार के आगे 15 शून्य कितना बड़ा अंतर है !

महार लोक : ध्रुव लोक के ऊपर 1 करोड़ योजन अंतर, मतलब 12 करोड़, 29 लाख, 53 हजार, 881 किलो मीटर ऊपर एक स्थान है जिसे महार लोक कहा जाता है इस लोक को स्वर्ग लोक का ही भाग माना जाता है इस स्थान पर ब्रमांड की साधरण आत्माए रहती है शाश्त्रो के अनुसार जो लोग अपना जीवन साधारण तौर पर जीते है कभी किसी को दुःख नहीं देते ऐसे लोगो की आत्माए मृत्यु के बाद इस स्थान पर अपना नया जीवन आरम्भ करते है ! यहाँ पर मन को शांति देने वाला पृकृति का सुंदर नज़ारा होता है यहाँ के लोग अपने आप को भाग्यशाली मानते है और हमेशा खुश रहते है!

जनलोक : महार लोक के बाद आता है जनलोक ! यह महार लोक के ऊपर 2 करोड़ योजन यानिकी 24 करोड़ KM के पश्चात् आता है जनलोक ! इस लोक में पुन्य करने वाले और वह लोग जाते है जो अपना जीवन स्वयं को भूल दूसरो के कल्याण के लिए जीते है ! बहुत ही दिव्य स्थान होने के कारण इस स्थान में रहने वाले लोग देवतायो के दर्शन आसानी से कर सकते है !

तपोलोक : जनलोक के 8 करोड़ योज़न के बाद आता है तपोलोक यानिकी 98 करोड़ किलो मीटर के बाद आता है तपोलोक ! इस स्थान पर केवल कठिन परीक्षा देने वाले लोग ही जा सकते है जो लोग अपने जीवन के सारे सुखो को छोड़ कर केवल ईश्वर की भक्ति में लीन रहते है जैसे साधू, संत, ऋषि मुनि या सन्यासी आदि ही यहाँ जा सकते है ! यहाँ रहने वाले लोगो को स्वर्ग के देवतायो के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है ! यहाँ पर ब्रह्माण्ड की सभी उर्जायों को नेत्रित्व करने वाले देवी देवता रहते है जैसे की वरुण देव अग्नि देव !

सत्यलोक : तपोलोक के बाद आता है सत्यलोक ! यह 12 करोड़ योजन यानिकी एक अरव, 47 करोड़ 54 लाख 46 हज़ार 579 km के बाद आता है जहाँ पर स्वयं रहते है ब्रम्हा देव ! यहाँ केवल महान आत्माए ही जा सकती है ! जिन्होंने जन्म- जन्मो में अनेक पुन्य किये हो और महार लोक, जन लोक और तपोलोक में केवल इश्वर को पाने के लिए ही पर्यास किया हो !

वैकुण्ठ : सत्यलोक के बाद 2 करोड़ 62 लाख योजन यानि 32 करोड़ 21 लाख 39 हज़ार 169 km पर आता है वैकुण्ठ जहाँ भगवान विष्णु शेष नाग पर विराजमान है यह स्थान किसी भी आत्मा का अंतिम स्थान होता है यहाँ पर पहुँचने के बाद आत्मा जन्म और मृत्यु के बंधन से छुट जाती है यानिकी यहाँ जाने वाली  आत्मायो को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है इसे ही ब्रह्माण्ड का अंत कहा जाता है सारे ब्रह्माण्ड की आत्माए इसी स्थान पट केन्द्रित होती है.हमारी धरती से वैकुण्ठ की दुरी कितनी है यदि इसका अनुमान लगाये तो ये बनता है चार पदम् दस नील चालीस ख़रब तीन अरब पंद्रह करोड़ अठतर हजार चार सो चवालीस किलो मीटर ! आधुनिक टेकनोलोजी के आधार पर वहां पहुचने के लिए लगभग 12 लाख से भी ज्यादा साल लग सकते है लेकिन आद्यात्मिक तौर पर हम वहां क्षण भर में पहुँच सकते है  इसलिए अच्छे कर्म करते रहिये ! भगवान् की भक्ति में लीन रहिये  !

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